चम्बाघाट रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद करने के प्रस्ताव ने सोलन में जनाक्रोश भड़का दिया है। वीरवार सुबह स्थानीय लोगों को जानकारी मिली कि रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर फाटक को पहले अस्थायी और फिर स्थायी रूप से दीवार खड़ी कर बंद करने की कार्रवाई करेंगे। खबर मिलते ही सैकड़ों लोग वहां जुट गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान मौजूद रेलवे अधिकारी भी यह सुनकर हैरान रह गए कि स्थानीय प्रशासन ने जनता से कोई संवाद तक नहीं किया। लोगों ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला रेलवे और NHAI के बीच वित्तीय भागीदारी से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे लिखित प्रतिनिधित्व दोबारा देंगे और किसी भी कीमत पर इस फाटक को बंद नहीं होने देंगे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने इस संवेदनशील मुद्दे पर न तो कोई जनसुनवाई की और न ही निवासियों से राय ली। डीसी और एसडीएम की गैरमौजूदगी से गुस्सा और भड़क गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि करीब 1.5 लाख लोग इस फैसले से प्रभावित होंगे। खासकर आपातकालीन स्थितियों—मरीजों को अस्पताल ले जाने या शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए लोगों को दो किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा।
स्थानीय निवासियों सुदारा सिंह ठाकुर, अनुज (स्थानीय निवासी) और एडवोकेट नीरज भारद्वाज (स्थानीय निवासी) ने जानकारी दी कि यह सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सोलन शहर की लड़ाई है। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की आवाजाही और कारोबारियों का रोज़गार इस फैसले से बुरी तरह प्रभावित होगा। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर कानून-व्यवस्था बिगड़ी तो इसकी सीधी जिम्मेदारी डीसी और एसडीएम पर होगी।
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