हिमाचल प्रदेश विधि विश्वविद्यालय, शिमला ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानव गरिमा पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन किया

हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू), शिमला स्थित मानवाधिकार एवं विकलांगता अध्ययन केंद्र (सीएचआरडीएस) ने छात्र संवर्धन प्रकोष्ठ के सहयोग से 24 सितंबर 2025 को “परिवर्तन के लिए वाद-विवाद” शीर्षक से एक सफल वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया। एचपीएनएलयू की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय था: “कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानव बुद्धिमत्ता में संतुलन: क्या मानव गरिमा की रक्षा के लिए नियमन लागू किया जाना चाहिए?” इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी देखी गई और छात्रों ने कानून, नैतिकता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विचारों का महत्वपूर्ण आदान-प्रदान किया। इस वाद-विवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विकास के बीच मानव गरिमा की रक्षा के महत्व पर जोर दिया गया।

इस वाद-विवाद का निर्णायक प्रतिष्ठित निर्णायक डॉ. हनी कुमार और डॉ. नरिंदर पाल थे, जिन्होंने गहन विचार-विमर्श के साथ इस आयोजन के शैक्षिक महत्व को बढ़ाया। प्रतियोगिता के विजेता आयुष कुमार (प्रथम स्थान), मोरवी शर्मा (द्वितीय स्थान), और आयुष शर्मा एवं वंशिका बांगर (तृतीय स्थान) थे। इस कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डिसेबिलिटी स्टडीज़ के संकाय निदेशक डॉ. सचिन शर्मा, छात्रा संयोजक सुश्री अशपिंदर कौर और छात्रा सह-संयोजक सुश्री सामिया मिर्ज़ा ने किया था। कार्यक्रम का समापन कानून, प्रौद्योगिकी और मानवाधिकारों के अंतर्संबंधों वाले समकालीन मुद्दों पर निरंतर संवाद के आह्वान के साथ हुआ।