सोलन डिग्री कॉलेज आज छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ छात्रों की आवाज़ से गूंज उठा। भारतीय छात्र संघ ने कॉलेज में जोरदार प्रदर्शन करते हुए दो बड़ी मांगें रखीं—पहली, 2013 से बंद पड़े छात्र परिषद चुनावों को तुरंत बहाल किया जाए और दूसरी, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए लर्निंग आउटकम करिकुलम फ्रेमवर्क ड्राफ्ट को वापस लिया जाए। एसएफआई कैंपस सचिव ने इसे आरएसएस का एजेंडा करार देते हुए छात्र विरोधी बताया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन और उग्र होगा तथा छात्र विधानसभा तक मार्च करेंगे।
सह-संयोजक तेंजिन जिला सचिव रोहित , विकास , और राघव ने कहा कि छात्र परिषद चुनावों के न होने से कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों के ज़रिए छात्र प्रतिनिधि कॉलेज फंडिंग की निगरानी करते थे, लेकिन अब छात्रों की मूलभूत सुविधाएं भी अधूरी रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 12 सालों में शिक्षा संस्थानों में घोटाले बढ़े हैं और छात्रों के हितों की अनदेखी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनावों को झगड़ों का बहाना बनाकर रोक रही है, जबकि विवाद तो आज भी होते हैं। उन्होंने कहा कि एलओसीएफ ड्राफ्ट पर भी एसएफआई कड़ा विरोध दर्ज करती है क्योंकि कि विज्ञान विषयों में सरस्वती वंदना और कॉमर्स में कौटिल्य का अर्थशास्त्र पढ़ाना गैर-वैज्ञानिक है। इतिहास से क्रांतिकारियों को हटाकर सावरकर को भी विद्यार्थियों पर थोपा जा रहा है।
बाइट सह-संयोजक तेंजिन जिला सचिव रोहित , विकास , और राघव