सोलन जिले ने सेब उत्पादन में नई पहचान स्थापित करते हुए अब आधिकारिक तौर पर एप्पल वैली का दर्जा हासिल कर लिया है। उद्यान विभाग की उपनिदेशक शिवाली ठाकुर ने जानकारी दी कि यह बदलाव 2016-17 में शुरू हुए वर्ल्ड बैंक समर्थित एचपीएचडीपी प्रोजेक्ट के चलते संभव हो पाया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत विदेशों से उच्च गुणवत्ता वाली सेब की किस्में लाई गईं और हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक को सोलन में बढ़ावा दिया गया। हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक के जरिए किसान कम भूमि पर अधिक पौधे लगाकर बेहतर उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में लगभग 16 हेक्टेयर क्षेत्र इस आधुनिक तकनीक के अंतर्गत आता है, जबकि पूरे जिले में कुल 238 हेक्टेयर भूमि पर सेब की खेती की जा रही है। पिछले वर्ष किसानों को लगभग 210 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।उपनिदेशक शिवाली ठाकुर ने बताया की सोलन की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां सेब की फसल जुलाई के अंत तक तैयार हो जाती है। समय से पहले तैयार होने की वजह से किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। अधिकांश बागवान राजस्थान तक अपना माल भेजकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। उपनिदेशक ने किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक हाई डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक अपनाएं। उन्होंने कहा कि दिसंबर-जनवरी के दौरान पंजीकृत नर्सरी से पौधे खरीदकर लगाना सबसे उपयुक्त समय है। इसके साथ ही विभाग द्वारा जारी छिड़काव सारणी का पालन करने और पौधों की उचित देखभाल करने से किसान निश्चित रूप से ऊंची आमदनी कमा सकते हैं।बाइट उपनिदेशक शिवाली ठाकुर