लॉटरी पर सोलन में मिला-जुला रुख, व्यापारियों और विद्यार्थियों ने किया कड़ा विरोध

सोलन – हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लॉटरी शुरू करने के एलान को लेकर सोलन में लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है, लेकिन व्यापारियों और विद्यार्थियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है। विरोध करने वालों का कहना है कि लॉटरी एक नशे और सट्टे का रूप है, जो समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को गलत रास्ते पर ले जाएगी। उनका आरोप है कि यह प्रणाली लोगों की मेहनत की कमाई को बर्बाद करती है और एक तरह से संगठित अपराध के समान है। विरोध करने वालों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और अगर वास्तव में विरोध है, तो ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह की लॉटरी एवं सट्टेबाजी को प्रदेश में पूरी तरह बंद किया जाए।शहर वासियों  देवम कंवर , मनीष साहनी , अंशुल ठाकुर  का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही 8 से 10 लाख से अधिक लोग बेरोजगार हैं और ऐसे में लॉटरी जैसी व्यवस्था नशे की लत को बढ़ावा देगी। उन्होंने याद दिलाया कि अप्रैल 1999 में प्रेम कुमार धूमल सरकार ने लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था और 2004 में वीरभद्र सिंह सरकार ने भी इसे पूरी तरह बंद कर दिया था। सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के तर्क को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया और ऑनलाइन लॉटरी पर भी प्रतिबंध की मांग की। लोगों ने कहा कि मोबाइल फोन हर घर में होने से यह पता लगाना मुश्किल है कि कौन इसमें पैसा लगा रहा है, इसलिए ड्रीम 11 जैसे अन्य ऑनलाइन सट्टेबाजी खेलों पर भी रोक लगनी चाहिए।बाइट  देवम कंवर , मनीष साहनी , अंशुल ठाकुर