हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कैबिनेट में ऐसा ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लिया है, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। अब प्रदेश में जब भी पुलिस भर्ती होगी, सबसे पहले युवाओं का हैरोइन ड्रग टेस्ट किया जाएगा। अगर कोई भी अभ्यर्थी नशे की चपेट में पाया गया, तो न केवल उसकी भर्ती रद्द होगी, बल्कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। यह फैसला हिमाचल को देश का पहला राज्य बनाता है, जिसने पुलिस भर्ती में हैरोइन टेस्ट को अनिवार्य किया है। यह निर्णय सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि नशामुक्त हिमाचल की दिशा में एक सशक्त संदेश है।सोलन में इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत हुआ है। इंटरनेशनल स्पोर्ट्स फ़िज़ियो थेरेपिस्ट डॉक्टर कुशल तिवारी और स्थानीय नागरिकों विजय दुग्गल , मनीष साहनी , अभिभावकों और युवाओं ने इसे “समाज के हित में उठाया गया ऐतिहासिक कदम” बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय केवल पुलिस बल को अनुशासित नहीं बनाएगा, बल्कि पूरे युवा वर्ग को नशे से दूर रहने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों से लगे हिमाचल में नशे का बढ़ता खतरा चिंता का विषय रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कदम न केवल समाज की सुरक्षा, बल्कि युवाओं के भविष्य को बचाने की एक निर्णायक पहल है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि जो राष्ट्र की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें पहले स्वयं स्वच्छ और मजबूत होना होगा। सुक्खू सरकार का यह निर्णय एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत है। बाइट डॉक्टर कुशल तिवारी , विजय दुग्गल , मनीष साह