अनिरुद्ध सिंह की हुंकार से हिली एनएचएआई की दीवारें, हिमाचल में जागी न्याय की लौ

हिमाचल में जब जनता एनएचएआई की मनमानी से टूट रही थी, तब कोई नेता नहीं बोल रहा था। पर जब से मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने अपने दमदार तेवरों के साथ आवाज़ उठाई है, तब से पूरे प्रदेश में उम्मीद की चिंगारी शोला बन गई है।

एनएचएआई के डंडे तले दबे लोगों ने अब चुप रहना छोड़ दिया है। अनिरुद्ध सिंह की हुंकार ने दिल्ली तक हलचल मचा दी है। यही कारण है कि अब सांसद अनुराग ठाकुर भी अनिरुद्ध की आवाज़ में आवाज़ मिलाने को मजबूर हुए हैं। उन्हें भी अब यह एहसास हो गया है कि जो जनता उन्हें चुनकर दिल्ली भेजती है, उनकी लड़ाई से मुंह मोड़ना राजनीतिक अपराध होगा।

अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि अब हिमाचल की धरती पर कोई भी अधिकारी मनमानी करेगा तो उसे जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर एनएचएआई किसी व्यक्ति का घर सड़क के 100 मीटर दायरे में गिराता है या नुकसान पहुंचाता है, तो उसे मुआवजा मिलना ही चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने यह सनसनीखेज खुलासा किया कि एनएचएआई के अधिकारी पीड़ितों को धमकाकर चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन अनिरुद्ध सिंह अब पीछे हटने वालों में नहीं। उन्होंने खुले मंच से कहा है कि यदि किसी पीड़ित के पास कानूनी लड़ाई लड़ने के पैसे नहीं हैं, तो वे खुद आर्थिक मदद देने को तैयार हैं। उनका यह कहना नहीं, एक वचन है — कि अब हिमाचल का कोई नागरिक अकेला नहीं है।

जिस चुप्पी में अन्य नेता सहमे बैठे थे, वहां अनिरुद्ध सिंह गरज रहे हैं। और अब जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक ट्वीट कर इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कह रहे हैं, तो यह साफ है — हिमाचल की आवाज़ दिल्ली की दीवारों से टकरा चुकी है।

अनिरुद्ध सिंह अब सिर्फ एक मंत्री नहीं, **हजारों टूटे घरों की आवाज़ बन चुके हैं। उनकी यह लड़ाई सिर्फ एनएचएआई से नहीं, उस व्यवस्था से है जो ताकतवर के आगे आम आदमी को कुचलने की इजाज़त देती है। लेकिन अब नहीं — अब अनिरुद्ध सिंह खड़े हैं। और जब सच की आवाज़ इतनी बुलंद हो, तो झूठ कितनी भी बड़ी संस्था क्यों न हो, टिक नहीं सकता।