पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप ने उठाई “पाल” जाति के अधिकारों की आवाज, केंद्र और बिहार सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली: पूर्व सांसद और अखिल भारतीय कोली समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कश्यप ने बिहार की अनुसूचित जाति सूची में दर्ज “पाल” जाति और उसके पर्यायवाची नामों (तांतिया-तंतुया) को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

वीरेंद्र कश्यप ने प्रेस नोट के माध्यम से कहा कि 1950 से ही “पाल” जाति को अनुसूचित जातियों में शामिल किया गया है, लेकिन अब इसे योजनाबद्ध तरीके से नजरअंदाज कर अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार और कुछ राजनीतिक शक्तियाँ जातिगत पहचान को दबाने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि यह मामला 1967 से लंबित है और अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार और बिहार सरकार इसमें स्पष्ट निर्णय लें। वीरेंद्र कश्यप ने यह भी कहा कि यह केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक, शैक्षणिक और आर्थिक हक़ों का प्रश्न है।

उन्होंने जानकारी दी कि कोली समाज का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दिल्ली में उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाएगा। वीरेंद्र कश्यप ने स्पष्ट कहा कि समाज के हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से संघर्ष किया जाएगा और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।