प्रदेश सरकार के न्यायसंगत फैसलों की पोल खोलती एक और घटना सामने आई है। पटवारी-कानूनगो संघ द्वारा नायब तहसीलदार की पदोन्नति में 20% कोटा हड़पने की कोशिश पर अब डीसी ऑफिस कर्मचारी संघ भी खुलकर विरोध में उतर आया है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनके अधिकारों से खिलवाड़ किया गया, तो वे मास लीव पर जाने को मजबूर होंगे।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप!
डीसी ऑफिस कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष लोकेंद्र चौहान ने प्रेस वार्ता में दो टूक कह दिया कि सरकार अपना वादा तोड़ रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद आश्वासन दिया था कि कोटे से छेड़छाड़ नहीं होगी, लेकिन अब पटवारी-कानूनगो संघ स्टेट कैडर की आड़ में डीसी ऑफिस कर्मचारियों के अधिकार छीनने में लगा है। क्या सरकार अपने कर्मचारियों के साथ धोखा करने पर उतारू है?
कर्मचारियों का गुस्सा उबाल पर!
सरकार के इस रवैये से डीसी ऑफिस कर्मचारी संघ में भारी नाराजगी है। संघ ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। सरकार यदि समय रहते नहीं चेती, तो प्रदेशभर के सरकारी कार्यालय ठप हो सकते हैं।
अब सरकार क्या करेगी?
अब सवाल उठता है कि क्या सरकार अपने कर्मचारियों के हक की रक्षा करेगी या फिर बेवजह की राजनीति में उनका भविष्य दांव पर लगाएगी? कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटने से पहले सरकार को तुरंत इस मुद्दे पर संज्ञान लेना होगा, वरना यह आंदोलन सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकता है!