हिमाचल प्रदेश के निगम में लोन लेने वालों की नीयत अब खुलकर सामने आ गई है। निगम के प्रबंध निदेशक अजय कुमार यादव ने दो टूक कहा है कि अधिकतर लोगों ने लोन धोखा देने की नीयत से लिया था, जिसके कारण निगम का एनपीए बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 46 साल में 400 करोड़ से ज़्यादा की राशि 2.6 लाख परिवारों को बांटी गई, लेकिन अब निगम को ऐसे डिफॉल्टरों से जूझना पड़ रहा है जो जानबूझकर पैसा नहीं लौटा रहे।करीब 900 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या आज भी खुली है। निगम अब उन 70 बड़े डिफॉल्टरों पर शिकंजा कस रहा है, जिनकी राशि 6 करोड़ रुपये से अधिक है। कई मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, और 22 मामलों में जमीन की नीलामी अंतिम चरण में है। इससे घबराकर कई डिफॉल्टर अब पैसा जमा करने को मजबूर हुए हैं।अजय यादव ने कहा की कि अधिकतर केस प्राकृतिक आपदा या मजबूरी के नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई ठगी हैं। सिरमौर का मामला इसका बड़ा उदाहरण है, जहां 22.5 लाख का लोन लेकर पशु खरीदने का दावा किया गया, लेकिन बाद में पूरा सेटअप ही गायब मिला।MD यादव ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत पाई गई, तो वे भी कार्रवाई से नहीं बचेंगे। अब निगम ने साफ कर दिया है—लोन लिया है तो लौटाना ही होगा, चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो।