पोषण माह और पोषण आहार दिवस के अवसर पर हिमाचल में महिला स्वयं सहायता समूहों ने परंपरा और पोषण को जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की है। स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को न केवल स्वास्थ्य के नजरिए से पेश किया गया, बल्कि इन्हें महिलाओं की आजीविका का माध्यम भी बनाया जा रहा है।
नौणी पंचायत की डिम्पल वर्मा ने सिड्डू जैसे पौष्टिक और पारंपरिक व्यंजन पेश किए। उन्होंने बताया कि सिड्डू प्राकृतिक आटे से तैयार किया जाता है और तला नहीं जाता, बल्कि भाप में पकाया जाता है। साथ ही तवा चपाती और आलूबुखारा, खुर्मानी व आंवला की कैंडी भी लोगों को खूब पसंद आ रही है।
सोलन ब्लॉक की ममता ठाकुर ने मक्की की रोटी, साग, मालपुरे, लाल चावल की खीर, पुए और असूली जैसे पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए। उन्होंने सात रंगों की पौष्टिक थाली और रागी लड्डू को विशेष रूप से दिखाया—जो धीरे-धीरे फिर से आम लोगों की थाली में लौट रहे हैं। इसके अलावा सोयाबीन लड्डू, दलिया और काले चने का चाट भी तैयार किया गया।
वहीं ग्राम पंचायत विशाल की कुसुम लता ने हल्दी के फूलों से बनी सब्जी के औषधीय गुणों पर जोर दिया। उनका कहना है कि हल्दी मोटापा, और पुरानी चोटों में लाभदायक होती है।
इन सभी समूहों की महिलाएं सामूहिक रूप से स्टॉल लगाकर पौष्टिक और पारंपरिक भोजन बेच रही हैं। यह पहल न सिर्फ स्थानीय खानपान को बढ़ावा दे रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई दिशा भी दिखा रही है।बाइट कुसुम लता ,डिंपल वर्मा,ममता ठाकुर