लहरों से लड़ कर नौका पार करने वाले 5 होनहारों की कहानियां, जो मुसीबतों को मात देकर बने IAS अफसर

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2022 का रिजल्ट जारी कर दिया है, और परिणाम सामने आते ही हमें एक से बढ़ कर एक संघर्ष की कहानियां सुनने और पढ़ने को मिल रही हैं. आज हम आपके लिए ऐसी ही कुछ कहानियां (Inspirational stories for IAS-PCS aspirants) लेकिन आए हैं, जो बताती हैं कि मेहनत करने वालों की हार नहीं होती और इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सकता है.

1. Bajrang Yadav: पिता की हत्या के बाद बेटा IAS बना

bajrangANI

यूपी के बस्ती जिले के गुड्डी गांव के एक किसान के बेटे बजरंग यादव ने भी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में सफलता हासिल की है. वो 454वीं रैंक लेकर आए हैं. बजरंग यादव के लिए यूपीएससी परीक्षा पास करने का सफर आसान नहीं था. उनके ऊपर ग़मों का पहाड़ उस वक़्त टूट पड़ा, जब साल 2020 में उनके पिता राजेश यादव की हत्या कर दी गई थी.

जानकारी के मुताबिक बजरंग के पिता ने अपना अधिकतर समय गांव में गरीबों और वंचितों की मदद करने के लिए समर्पित कर दिया था. पिता के निधन ने बजरंग को अंदर से झकझोर कर रख दिया. हालांकि, उन्होंने खुद को संभाला और हिम्मत नहीं हारी. पिता की स्मृति का सम्मान करते हुए उन्होंने आईएएस ऑफिसर बनने की ठानी और सफल होने तक नहीं रुके.

2. Hussain Syed: पिता मजदूर, बेटा IAS अफसर

Hussain Syed UPSC Crack of Mumbai  Ummid

27 वर्षीय हुसैन सैयद अपने माता-पिता के अनपढ़ होने के बावजूद यूपीएससी की परीक्षा पास कर अपने इलाके के लिए मिनी सेलिब्रिटी और रोल मॉडल बन गए. हुसैन ने ने मुफलिसी और मुश्किल हालातों में अपने हौसले को बनाए रखा और मेहनत के दम पर पांचवें प्रयास में UPSC की परीक्षा में 570वीं रैंक हासिल की है.

हुसैन मुंबई के उस झोपड़पट्टी इलाके में रहते हैं, जहां अधिकतर डॉक में काम करने वाले मजदूर का परिवार अपना जीवन यापन करता है. उनके पिता रमजान इस्माइल सैयद इंदिरा डॉक में लोडिंग और अनलोडिंग सेक्शन में काम करते हैं और मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं. उनकी मेहनत रंग लाई और अब उनका बेटा IAS अफसर बन गया है.

3.  Suraj Tiwari: पिता दर्जी, बेटा 917 रैंक लेकर लाया

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले सूरज तिवारी ने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा 2022 में भले ही 917 रैंक हासिल की है, लेकिन जिन मुश्किल हालातों में दिव्यांग सूरज ने पढ़ाई कर सफलता प्राप्त की है, वो अपने आप में अविश्वसनीय है. सूरज तिवारी के दोनों पैर नहीं हैं. एक हाथ भी भी नहीं है. दूसरे हाथ में सिर्फ 3 उंगलियां हैं. उन्होंने एक हादसे में अपने शरीर के बेहद जरूरी अंग खो दिए थे.

मगर अपने अंदर के जज्बे को कम नहीं होने दिया. मुश्किल हालात और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने मेहनत के साथ पढ़ाई की और यूपीएसी की परीक्षा पास की.सूरज के पिता रमेश कुमार दर्जी हैं. मैनपुरी के कुरावली गांव में उनकी छोटी सी एक सिलाई की दुकान है. उन्होंने ANI से कहा ‘मैं आज बहुत खुश हूं, मेरे बेटे ने मुझे गौरवान्वित किया है. वह बहुत बहादुर है. उसकी तीन उंगलियां सफल होने के लिए काफी हैं.’

4. Divya Tanwar: मां ने मजदूरी कर पढ़ाया, बेटी बनी IAS

2021 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 438वां रैंक हासिल करने वाली दिव्या तंवर 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. जब उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास की तब उनकी उम्र मात्र 21 साल थी. हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गांव निंबी की रहने वाली दिव्या तंवर की कहानी सिर्फ उनके आईपीएस बनने तक की नहीं है, बल्कि इस साल के UPSC परीक्षा में उन्होंने सफलता की एक और नई कहानी लिखी है. दिव्या तंवर ने दोबारा से UPSC में बाजी मारते हुए अपने दूसरे प्रयास में 105वां रैंक हासिल किया है. हिंदी मीडिया से पढ़ी दिव्या ने नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा प्राप्त की है.

उनके घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. परिवार पर दुखों का पहाड़ उस समय टूटा जब 2011 में उनके पिता की मौत हो गई. इसके बाद मां ने मेहनत-मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया. दिव्या ने महेंद्रगढ़ के ही राजकीय महिला कॉलेज से बीएससी करने के बाद यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी, और अब IAS अधिकारी बनकर परिवार का नाम रौशन दिया.

5. मोहित कुमार: दादा बनाते थे बर्तन, क्रैक की UPSC

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मोहित कुमार यूपी के मेरठ के रहने वाले हैं और यूपीएससी 2022 की परीक्षा में 512वीं रैंक लेकर आए हैं. मोहित के पिता पीतम सिंह ने प्राइवेट नौकरी कर बेटे को पढ़ाया और अफसर बनने के लिए तैयार किया. मोहित ने 8वें प्रयास में यह सफलता हासिल की है. इससे पहले मोहित ने 2019 बैच के तहत डिप्टी जेलर के रूप में सफलता हासिल की थी, और वर्तमान में यूपी के मैनपुरी में डिप्टी जेलर के रूप में तैनात हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहित के दादा दाताराम अपने गांव में मिट्टी के बर्तन बनाते थे. उनका सपना था कि उनका पोता बड़ा होकर अधिकारी बने. दादा ने ही उन्हें मेहनत करके आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया था, जिस पर वो निरंतर चलते रहे और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर दिया है. इसके चलते अब उनके पूरे परिवार में खुशी का माहौल है.